नरेंद्र मोदी पर जारी है व्हार्टन में बहस

  • 12 मार्च 2013
वहार्टन स्कूल
अमरिका का मशहूर वहार्टन बिज़नेस स्कूल

भारत ही नहीं, अमरीका में भी गुजरात के मुख्य मंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में लोगों की राय बंटी हुई है.

अमरीका के मशहूर व्हार्टन बिज़नेस स्कूल में मोदी का भाषण रद्द होने के बाद वहां कई शहरों में रहने वाले मोदी के समर्थकों और विरोधियों के बीच ज़बरदस्त बहस छिड़ गई है.

फ़िलाडेल्फ़िया स्थित पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में बहस जारी है. पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफ़ेसर और छात्र नरेंद्र मोदी को मुख्य वक्ता के तौर पर बुलाए जाने के विरोध में थे.

उन्होंने व्हार्टन बिज़नेस स्कूल को पत्र लिखा था और मोदी को वक्ता सूची से हटाए जाने की मांग की थी.

विरोध की मुहिम

नरेद्र मोदी के बारे में अमरिकी मूल के भारतीयों में अलग-अलग राय है

शशांक सैनी इसी पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के छात्र हैं और वे मोदी का विरोध करने वाली मुहिम में शामिल हैं.

सैनी कहते हैं, "हमारा विरोध विशेष वक्ता नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ है. मोदी का मानवाधिकार रिकॉर्ड बहुत खराब है. और वे किस विकास की बात करते हैं? क्या गोधरा के मुसलमानों का विकास हो रहा है? क्या गुजरात के बच्चों और महिलाओं का विकास हो रहा है?"

दूसरी ओर नरेंद्र मोदी के कई समर्थक ऐसे हैं जिनका मानना है कि उनके भाषण से व्हार्टन के छात्रों का फ़ायदा ही होता.

गुजराती मूल के एक छात्र चिराग दवे कहते हैं, "पिछले दस साल में मोदी साहब ने पूरा गुजरात बदल कर रख दिया है. उनको बुलाना चाहिए था और सीखना चाहिए था कि उन्होंने यह कैसे किया."

बहस

वहार्टन स्कूल के भारतीय मूल के छात्रों के बीच मोदी को लेकर गर्मा-गर्म बहस छिड़ गई है.

पिछले शनिवार व्हार्टन स्कूल में एमबीए के कुछ भारतीय मूल के छात्रों के बीच इस मुद्दे पर गर्मा-गर्म बहस चल रही थी.

एक छात्र ने कहा, "क्या इस फ़ोरम के आयोजकों को कोई और नहीं मिला, जो मोदी को बुला लिया."

वहीं साथ में खड़े छात्र मेहुल त्रिवेदी से जब पूछा गया कि आप इस मुद्दे पर क्या रूख रखते हैं. तो उन्होंने बताया, "मैं समझता हूं कि चाहे नरेंद्र मोदी हों या खुद मैं, बिना उचित कारण बताए निमंत्रण रद्द करना सही नहीं है."

कई और मोदी समर्थकों का मानना है कि इस तरह नरेंद्र मोदी का विरोध करने वाले लोग भारतीय जनता द्वारा चुने गए एक नेता के बोलने के अधिकार का हनन कर रहे हैं.

आलोजना से परे नहीं

मोदी को अपना मौखिक समर्थन देने के अलावा, कुछ मोदी समर्थक इस मामले में अमरीकी अदालत के दरवाजा भी खटखटा सकते हैं.

इसके विपरीत, मोदी विरोधियों का कहना है कि मोदी ने चुनाव ज़रूर जीता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उनकी कोई आलोचना नहीं कर सकता.

पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय की भारतीय मूल की प्रोफ़ेसर अनिया लूंबा ने व्हार्टन के इस आर्थिक फ़ोरम में मोदी को शामिल किए जाने का पुरजोर विरोध किया.

उनका कहना है, " मोदी को हमारी यूनिवर्सिटी में नहीं बुलाया जाना चाहिए. हमने इसके बारे में केवल चिट्ठी लिखी. हम उन्हे कोई जेल में नहीं बंद कर रहे हैं, न ही उनको खामोश कर रहे हैं. उनके भाषण तो हर जगह छपते हैं, टीवी पर भी प्रसारित किए जाते हैं.”

इस मामले में नरेंद्र मोदी का विरोध करने वाले सन 2002 के गुजरात दंगों के लिए मोदी को ही ज़िम्मेदार ठहराते हैं. और मोदी के व्हार्टन के फ़ोरम में वक्ता की हैसियत से शामिल होने के पीछे भी इन्हें राजनीतिक हथकंडा ही नज़र आता है.

नो एंट्री

पेनसिलवेनिया विश्वविद्यालय की भारतीय मूल की प्रोफ़ेसर अनिया लूंबा ने वहार्टन के आर्थिक फ़ोरम में मोदी को शामिल किए जाने का विरोध किया था.

विरोध के बावजूद नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अहमदाबाद से वीडियो लिंक के ज़रिए अमरीका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को संबोधित किया.

एक स्थानीय भारतीय टीवी चैनल पर उनका वह भाषण प्रसारित भी किया गया और न्यू जर्सी और शिकागो जैसे शहरों में उनके भाषण को कई भारतीय मूल के लोगों ने पूरे ध्यान और सम्मान से सुना.

यूरोप और ब्रिटेन की सरकारों ने मोदी की ओर अब नरम रुख भले ही अपना लिया हो, लेकिन अमरीकी सरकार ने अब भी नरेंद्र मोदी के लिए ‘नो एंट्री’ का बोर्ड लगा रखा है.

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