यौन प्रताड़ना बिल पर नहीं बनी सहमति

  • 12 मार्च 2013
राजधानी दिल्ली में महिला सुरक्षा बड़ा मुद्दा है

यौन प्रताड़ना के खिलाफ बिल पर मंगलवार को कैबिनेट में सहमति नहीं बन पाई जिसके बाद उसे मंत्रिसमूह के पास भेज दिया गया है.

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि इस मंत्रीसमूह ने बिल पर काफी काम कर लिया है और बुधवार को भी बैठक होगी ताकि गुरुवार तक बिल कैबिनेट को सौंपा जा सके.

कैबिनेट में बिल पर सहमति न बनने के बाद ये सवाल उठाया जा रहा है कि क्या इसे मौजूदा संसद सत्र में पेश किया जा सकेगा.

सरकार ने उम्मीद जताई है कि ये विधेयक इस बजट सत्र में 22 मार्च से पहले पारित हो जाएगा.

पिछले साल दिल्ली गैंगरेप मामले के बाद सरकार तीन फरवरी को अध्यादेश लेकर आई थी जिसमें बलात्कार के दोषियों के खिलाफ कानून को और कड़ा करने का प्रावधान है. लेकिन इस अध्यादेश को 22 मार्च से पहले संसद में पारित कराना होगा वरना ये चार अप्रैल को इसकी अवधि समाप्त हो जाएगी.

क्या है मतभेद

कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर गतिरोध बना हुआ है. इसमें सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र घटाकर 16 साल करने की बात शामिल है. पीटीआई के मुताबिक बाल और महिला कल्याण मंत्रालय का तर्क है कि अगर ये उम्र सीमा घटाई गई तो जूविनाइल जस्टिम एक्ट जैसे कानूनों को भी बदलना पड़ेगा.

साथ ही मंत्रालय को ये लगता है कि भारतीय समाज अभी इस तरह के बदलाव के लिए तैयार नहीं है.

इसके अलावा स्टॉकिंग या किसी का पीछा करने जैसे कदमों को भी अपराध के दायरे में लाने को लेकर मतभेद हैं.

बताया जा रहा है कि कुछ पार्टियों को आशंका है कि इस प्रावधान का गलत उपयोग किया जा सकता है.

साथ ही बलात्कार की जगह यौन प्रताड़ना शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी एकराय नहीं है.

इस प्रस्तावित कानून को संसद में आसानी से पारित कराने के लिए संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने सोमवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है.

बिल पर चर्चा के लिए बनाए गए मंत्रीसमूह में कानून मंत्री, गृह मंत्री, महिला और बाल कल्याण मंत्री शामिल, पी चिदंबरम और कपिल सिब्बल शामिल हैं.

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