बीबीसी हिन्दी सुन बने थे ज़ियाउल हक़ डीएसपी

  • 12 मार्च 2013
ज़िया-उल-हक़ को बीबीसी से बेहद लगाव था

उत्तर प्रदेश के कुंडा में जिस वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी वह बीबीसी हिन्दी के नियमित श्रोता थे और इसकी ख़बरों के नोट्स बनाया करते थे.

ज़िया-उल-हक़ की पत्नी परवीन आज़ाद ने अपने ससुराल में बीबीसी से हुई विशेष बातचीत में ऐसे कई पल याद किए जब उनके पति ने उनसे बताया था कि कैसे बीबीसी पर खबरें सुनने से उन्हें परीक्षा में मदद मिली.

उन्होंने बताया, "जिया ने मुझे बताया था कि जब वह इलाहाबाद में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुटे थे तो शाम को साढ़े सात बजे बीबीसी हिन्दी पर आने वाली ख़बर सुनना कभी नहीं भूलते थे. वह खाना बनाने के साथ-साथ बगल में रेडियो पर बीबीसी सुनते थे और ज़रूरी ख़बरों के नोट्स भी बनाते थे."

ज़िया-उल-हक़ की हत्या के बाद से उनकी पत्नी पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में ज़ुआफर गाँव स्थित अपने ससुराल में हैं और उनके मुताबिक़ वह अपने 'हक की लड़ाई लड़ रहीं हैं'.

गौरतलब है कि मृत पुलिस अधिकारी की पत्नी परवीन ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री राजा भैया पर अपने पति की हत्या में शामिल होने का मुकदमा दर्ज कराया है.

शोक की इस घड़ी में भी जब दोपहर के भोजन के बाद आराम कर रहीं परवीन आज़ाद को ख़बर मिली कि एक बीबीसी संवाददाता उनसे मिलने पहुंचे हैं तो वह तुरंत मिलने के लिए अपने कमरे से बाहर आ गईं .

मुझसे मुखातिब होते ही उनकी आँखें नम हो चुकीं थी और उनका पहला वाक्य यही था कि 'ज़िया को बीबीसी से बेपनाह मोहब्बत थी और बीबीसी पर बहुत भरोसा भी'.

परवीन आज़ाद ने बताया, "जब तक ज़िया की तैनाती अंबेडकर नगर ज़िले में थी तब तक वह नियमित रूप से बीबीसी सुनते रहे. शादी के बाद जब दहेज़ में टीवी मिला तब कहीं जाकर उन्होंने दूसरी ख़बरें देखनी-सुननी शुरू कीं".

रिश्तेदारों का तांता

करीब चौंसठ परिवार वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस गाँव में जैसे अभी भी मातम सा माहौल है. डीएसपी ज़िया-उल-हक़ को इलाके के लोग अब एक शहीद की हैसियत से देखने लगे हैं.

रोज़ सुबह लगभग ग्यारह बजे के बाद से शमशुल हक़ के यहाँ लोगों के आने-जाने का तांता लग जाता है.

दूर-दराज़ से आने वाले रिश्तेदार-नातेदार कुछ एक घंटे बैठ कर चले जाते हैं और घर के बाहर इसी वजह से दसियों कुर्सियां भी लगी दिखती हैं. ज़िया के भाई सोहराब अली हक़ इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि सभी को पीने का पानी या चाय पूछी जाए.

सोहराब ने इस बात को बार-बार दोहराया कि उनके दिवंगत भाई उनके लिए किस तरह तोहफे लाया लाया करते थे.

और तो और, ज़िया-उल-हक़ के पिता शमशुल हक़ ने बीबीसी का माइक देखते ही कह डाला, "जिया बचपन से ही बीबीसी को लेकर दीवाना था".

उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले कुंडा में तैनात पुलिस उपाधीक्षक जिया-उल-हक़ की हत्या के मामले में सीबीआई ने पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ 'रजा भैया' के खिलाफ जांच अपने हाथ में ले ली है.

परवीन आज़ाद के मुताबिक उनके पास भी सीबीआई से फोन आया था और जल्द ही उनसे मिलने एक टीम पहुँचने वाली है.

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