पानी की तरह बिक रहा है तेज़ाब...

  • 8 मार्च 2013
राजधानी दिल्ली में आसानी से मिलता है तेज़ाब

अगर आप रिवॉलवर या बंदूक या कोई भी हथियार खरीदने जाएँ तो ये इतना आसान नहीं है. आपको कई नियमों से होकर गुज़रना पड़ता है क्योंकि इन हथियारों से किसी की भी जान ली जा सकती है.

तेज़ाब हमले के बाद ज़िंदा लाश हूँ: अनु

तेज़ाब कोई हथियार तो नहीं पर किसी की ज़िंदगी हमेशा के लिए बर्बाद करने या किसी की जान लेने के लिए काफी होता है.

इस जानलेवा तेज़ाब को बाजा़र में कितनी आसानी या मुश्किल से खरीदा जा सकता है? यही पता लगाना के लिए मैं अपने साथी के साथ दिल्ली के ऐसे इलाके में पहुँची जहाँ इसकी बिक्री होती है. मन में कई सवाल थे कि जब दुकानदार पूछेगा कि तेज़ाब क्यों चाहिए तो क्या जवाब देंगे. काफी देर तक उधेड़ बुन में लगे रहे. लेकिन दिल्ली की इस गली में पहुँचते ही सारे शक दूर हो गए.

हमने पहली दुकान पर थोड़ा हिचकिचाते हुए तेज़ाब माँगा....माँगते ही हाज़िर हो गया. फिर दूसरी दुकान फिर तीसरी. कहीं कोई मनाही नहीं, कोई सवाल नहीं. ब्रैंडिड, बिना ब्रैंड वाला हर तरह का तेज़ाब उपलब्ध था. हमने बार-बार पूछा कि क्या इससे हाथ वगैरह तो नहीं जल जाएगा. जवाब में उसने कहा थोड़ा ध्यान से इस्तेमाल करिएगा हाथ का चमड़ा जल सकता है.केवल एक व्यक्ति ने हमें तेज़ाब देने से मन किया.

बाथरूम साफ करने के लिए तो टॉयलेट क्लीनर के नाम पर तेज़ाब 20-25 रुपए में ही मिल जाता है. लेकिन मैने पाया कि किसी को नुकसान पहुँचा सकने वाला तेज़ाब भी आसानी से खरीदा जा सकता है...तेज़ाब यहाँ पानी की तरह बिकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय पहले निर्देश भी दिया था कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों की बैठक बुलाई जाए ताकि तेज़ाब की बिक्री को रेगुलेट किया जा सके.

ऐसे ही हमले की शिकार हुई अनु की ये माँग है कि दुकानों में हर किसी के लिए तेज़ाब की आसान उपलब्धि बंद हो ताकि उसकी तरह किसी और लड़की को अपनी ज़िंदगी यूँ न गुज़रानी पड़े- बिना आँखों के और पूरी तरह खराब हो चुके चेहरे के साथ.

लाइसेंस प्रणाली कड़ी हो

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में 2011 में सरकार ने कहा था कि वो खास किस्म के तेज़ाब की बिक्री और वितरण पर पाबंदी लगा रही है ताकि एसिड अटैक में कमी आ सके.

वहाँ किसी व्यापारिक संस्थान में पंजीकृत लोग ही तेज़ाब खरीद सकते हैं और इस व्यापार में लगने वालों के पास सरकारी लाइसेंस होना चाहिए. साथ ही जो कोई भी तेज़ाब खरीदता है उसका नाम भी नोट किए जाने का प्रावधान है.

सुप्रीम कोर्ट की वकील कमलेश शर्मा मानती हैं, "बिना लाइसेंस के तेज़ाब नहीं मिलना चाहिए. इसे खरीदने के लिए लिखित प्रिस्क्रिप्शन होना ज़रूरी बना देना चाहिए.भारत में तेज़ाब इतने सस्ते दाम में बाज़ार में मिल जाता है."

तमिलनाडू में पिछले एक महीने में दो ऐसी लड़कियों की मौत हुई है जिन पर तेज़ाब फेंका गया था. इसके बाद मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र और तमिलनाडू सरकार को निर्देश दिया था कि वो तेज़ाब बिक्री पर अपना रुख़ स्पष्ट करे.

अब केंद्र ने मद्रास कोर्ट को बताया है कि उसने सभी सरकारों से इस बारे में विचार विमर्श कर लिया है और एक नीति बनाई है ताकि तेज़ाब की ब्रिकी का रेगुलेशन किया जा सके.

लेकिन कागज़ पर नीति तय होने, उसके कानून बनने और इसे कड़ाई से लागू होने के बीच लंबा समय लग जाता है. आज़ादी के बाद 60 सालों में इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार ही नहीं हुआ.इस बीच कितनी ही लड़कियों की ज़िंदगी तेज़ाब में जल कर खाक हो चुकी है.

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