तेज़ाब हमले के बाद सोनाली ने इच्छामृत्यु माँगी थी

  • 7 मार्च 2013
Image caption सोनाली पर 17 साल की उम्र में हमला हुआ था

उस खौफनाक हादसे को दस साल होने को हैं. 22 अप्रैल 2003 की रात सोनाली झारखंड में अपने घर की छत पर गहरी नींद में सो रही थी. कुछ लड़कों ने छत्त पर आकर सोती सोनाली पर तेज़ाब डाल दिया और भाग गए.

सोनाली का चेहरा किसी भट्टी की तरह जल उठा. और आंखों की रोशनी जाती रही. हमले के समय वो सिर्फ 17 साल की थी और कॉलेज में पढ़ती थी.

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उसके बाद के दस सालों में 27 साल की सोनाली जिन तकलीफों से गुज़री है उसे शब्दों में बयां करना भी मुश्किल है.

इस हालत के बावजूद सोनाली लगातार अदालत में केस लड़ती रही. छोटे शहर में एसिड अटैक पीड़ित का इलाज कैसे हो ये भी किसी को ठीक से नहीं पता था. इलाज में ज़मीन, गहने सब बिक गया. परिवार दिल्ली आकर सड़क पर रहने को मजबूर हो गया. इस बीच सोनाली के मामले में अभियुक्तों को सज़ा तो हुई पर ज़मानत मिल गई.

सोनाली से पहली बार मैं तीन महीने पहले मिली थी. सोनाली की दास्तां उसकी ज़बानी सुनने और उसे देखने के बाद मेरे रोंगटे खड़े हो गए थे. उससे मिलने के बाद एसिड अटैक का शिकार हुई जिन भी लड़कियों से मिली या उनके बारे में पढ़ा तो सबकी कहानी एक जैसी ही मालूम हुई.

इच्छामृत्यु चाहती थी

Image caption कुछ ऐसी दिखती थी सोनाली हमले से पहले

सोनाली का कसूर ये था कि उसने कुछ लड़कों के खिलाफ आवाज़ बुलंद की थी जो उसे छेड़ते थे. उन लड़कों को ये बात रास नहीं आई और बदला लेने के लिए उस पर तेज़ाब फेंक दिया.

सोनाली बताती है कि एक समय ऐसा भी आया जब न पैसे बचे, न खुद को कोई पहचान थी और न जीने की उम्मीद. उसने इच्छामृत्यु की याचिका दायर कर दी.

उसके बाद से कई हाथ सोनाली की मदद के लिए आगे बढ़े हैं. सोनाली ने भी हिम्मत दिखाई और आवाज़ बुलंद करनी शुरु की. अमिताभ बच्चन के कार्यक्रम कौन बनेगा करोड़पति में उसे आमंत्रित किया गया. उसे जीने का हौसला मिलने लगा.

हालांकि सोनाली की ज़िंदगी अब अस्पतालों के चक्कर लगाने और सर्जरी कराने के इर्द-गिर्द घूमती है. उसकी 20 से ज़्यादा सर्जरी हो चुकी है और अब अगले डेढ़ साल में उसकी करीब नौ सर्जरी और होनी है.

महिला दिवस पर बात करने के लिए जब मैने उसे फोन किया तो वो अस्पताल में थी- एक और सर्जरी के लिए.

सोनाली की आँखों की रोशनी शायद वापस न आए पर शायद उसका चेहरा कुछ हद ठीक हो जाएगा. लेकिन मन में बार-बार यही सवाल उठता है कि ये हादसा न हुआ होता तो अपने कॉलेज की शान समझे जाने वाली सोनाली शायद कुछ और हो सकती थी.

वो शायद पैसों के लिए किसी पर आश्रित न होती, पहचान का संकट उसके सामने न होता, अपनी उम्र की लड़कियों की तरह वो भी हँसती, घर बसाती, उसे कभी मर जाने का ख्याल न आता...

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